महाराज जी के लक्ष्य

🕉️ ‘वेद सेना’ (सनातन सेवा समिति) के विशिष्ट उद्देश्य और लक्ष्य –

यह संगठन दोहरी भूमिका निभाता हुआ प्रतीत होता है: आध्यात्मिक रक्षा (वैदिक ज्ञान की) और शारीरिक/सामाजिक रक्षा (धर्म की)।

1. वैदिक ज्ञान और धर्म की रक्षा (ज्ञानकाण्ड)

आपके कथन के अनुसार, इसमें केवल वैदिक ब्राह्मणों का होना, इस ओर संकेत करता है कि यह सेना मुख्य रूप से वैदिक ज्ञान के संरक्षण और प्रचार पर केंद्रित है।

  • वेद और शास्त्रों का संरक्षण: यह सुनिश्चित करना कि वेदों, उपनिषदों और अन्य प्राचीन शास्त्रों का अध्ययन और पठन-पाठन शुद्ध रूप से जारी रहे।
  • धार्मिक अनुष्ठान और कर्मकाण्ड: सभी वैदिक अनुष्ठानों, जैसे यज्ञ, पूजा और षोडश संस्कारों का सही विधि-विधान से पालन करना और समाज को इसके लिए मार्गदर्शन देना।
  • वैदिक शिक्षा का प्रचार: ‘श्री शिव-शक्ति वैदिक गुरुकुलम्’ जैसे माध्यमों से नई पीढ़ी को प्राचीन वैदिक शिक्षा और मूल्यों से जोड़ना।
  • सनातन मूल्यों की स्थापना: समाज में वैदिक सत्य, धर्म और न्याय के सिद्धांतों को पुनः स्थापित करना।

2. सामाजिक एवं शारीरिक रक्षा (कर्मकाण्ड और सेवा)

संगठन के व्यापक उद्देश्यों (जैसा कि उनकी वेबसाइट पर उल्लिखित है) के अनुसार, यह सेना समाज की सेवा और रक्षा के लिए भी काम करती है:

  • गौ-रक्षा और सेवा: गौ-शालाएँ स्थापित करना और गायों की रक्षा करना, क्योंकि गायों को वैदिक संस्कृति में पवित्र माना जाता है।
  • कुरीतियों का निवारण: समाज में फैली बुराइयों, जैसे दहेज प्रथा, नशा, बाल विवाह, और फिजूलखर्ची पर रोक लगाने के लिए जन-जागरूकता फैलाना।
  • प्रकृति संरक्षण: वृक्षारोपण और आयुर्वेद/स्वदेशी चिकित्सा पद्धति को बढ़ावा देना (जो वेदों के ‘उपवेद’ – आयुर्वेद से जुड़ा है)।
  • आत्मरक्षा और धर्म-रक्षा की प्रेरणा (भवानी सेना): यदि ‘वेद सेना’ का संबंध उनकी ‘राष्ट्रीय सनातन रक्षा सेना’ या ‘भवानी सेना’ से है, तो इसका उद्देश्य सनातनी व्यक्तियों को अपने परिवार, समाज और धर्म की रक्षा के लिए शस्त्र और शास्त्र दोनों से सक्षम बनाना हो सकता है।

गुरु परम्परा

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गैलरी

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